मानो वक्त इतना क्या बदला..
मानो वक्त दौड़ सा गया
चुटकी में दुनिया बदल गई,
अभी तो मुहॅं में लोलीपॉप था
लेकिन अभी मुहॅं पर मुछ आ गई।
मानो वक्त इतना क्या बदला
शांत नदी में बाढ़ आ गई,
अभी तो मैं हरा वृक्ष था
अभी सारी पत्तियां बिखर गई ।
मानो वक्त इतना क्या बदला
स्कूल, कॉलेज , जवानी सब छूट गई,
जो पासें हमने नहीं फेंके थे
उसी पासों पर जिंदगी चली गई।
मानो वक्त इतना क्या बदला
अभी लड़खड़ाते हुए चलना सिखा था
अभी भागदौड़ कर जान निकल गई ,
अब मानों पैर के नीचे अब की जमीन थी
अभी तो मानो वह खिसक गई ।
मानो वक्त इतना क्या बदला
सायकल से मोटरसायकल पर मोटरसायकल से फिर सायकिल पर जिंदगी आ गई,
जिंदगी के भाग दौड़ में मानो जिंदगी ही साथ छोड़ गई ।
मानो वक्त इतना क्या बदला
मेरे बोबडे मुॅंह पर ताला लग गया,
मेरे कलम की ताकद जो थी
वो नाव के समान नदी में बह गई ।
मानो वक्त इतना क्या बदला
हाथी जैसी जिंदगी चीटी बन गई,
और चिटीयों की तरह दौड़ते दौड़ते
मानो जिंदगी से जिंदगी हार गई।
मानो वक्त इतना क्या बदला
जिंदगी ने जिंदगी से जिंदगी की बात कर गई,
हम तो जीना चाहते थे
लेकिन जिंदगी
ने हमसे जिंदगी छिन ली ।
- विश्वनाथ भाटीकर

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